एक छोटासा कहानी

नोकर ओर मालिक 

एक नोकर था वह दिनमे मालिके बगैँचामे अपना दिन गुजारता था और संध्याकाल मे अपना घर वापास जाता था फिर उसके बात वो मालिक के घर नही गया दो दिन होगये नोकर नही आया मालिक हमेसा नोकर को काम शोपता था नोकर सीधा सादा भोला था मालिक का आधार करता था बचन का पालन करता था 



मालिक को परिसान होगया था फिर एक दिन मालिक नोकर को लेने घर बापस गया तो नोकर का कोई घर नही था मालिक परिसान होकर अपने घर लौट रहा था उस वक्त एक बड़ा सा मोहाल दिखाई दी सामने बहोत महँगी होटल था मालिक थोरा भूखा था सूबे से कुछ नही खाया था जब होटल पे पौचा तो उसने दीवार पर लटकता हुवा तस्बीरको देखा उसमे लिखा था 
नोकर सुपर रिऐलटी होटल मालिक को आश्चर्य लगा ये कौन सा नाम है  मालिक ने पैट भर खाना खा ली फिर अपना घर के रास्ता निकला रास्ते मे एक सुन्दर और महँगी मोहाल दिखाई दी बाहर अति सुन्दर द्रस्य था सब लोग खुश दिख रहे थे बच्चे खेल रहे थे मालिकको आश्चर्य लगा फिर सीधा घर तरफ निकला. एक सुन्दर ओर मेहंगी वाहन तेज गति के रफ्तार से आ रहा था और सीधा मालिक के सामने आकर रुका और अंदर से आवाज आया नौकर होटल का मालिक ने रास्ता बतादि

मालिक अपने घर वापस आया घर पर कोई नही था घरवाले निकल चुके थे  मालिक को कुछ समझ नही आ रहा था फिर सुबह वो घर से कुछ ही दूर जा रहा था तो एक सूट मे आदमी  दिखने मे से ही मालिक जैसा उसके हाथ मे मेहंगी घड़ी नौकर के साथ ब्याटकर कुछ खा रहा था मालिक को बओत आश्चर्या हुवा .





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